उत्तरप्रदेश

एम्स ऋषिकेश में 95 अटेंडेंस कर्मचारियों को निकाले जाने पर हंगामा

निकाले गए कर्मचारियों ने एम्स प्रशासन के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया

एम्स ऋषिकेश में 95 अटेंडेंस कर्मचारियों को निकाले जाने पर भड़के कर्मचारी

ऋषिकेश Rishikesh News: अखिल भारी आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश द्वारा 95 हॉस्पिटल अटेंडेंट सहायक को नौकरी से निकाले जाने के दिए गए नोटिस पर कर्मचारी भड़ उठे हैं. इन कर्मचारियों ने एम्स के एक गेट को तोड़कर अंदर घुस मेडिकल अधीक्षक कार्यालय के बाहर धरना देना शुरू कर दिया है. जिससे स्थानीय प्रशासन के हाथ पांव फूल गए.

उत्तराखंड सरकार द्वारा कोविड-19 के चलते सभी प्रकार के धरनों प्रदर्शनों के साथ राजनीतिक रैलियों पर लगाई गई रोक के बावजूद एम्स ऋषिकेश में कर्मचारियों पर आंदोलन के लिए उतरना पड़ रहा है. 95 हॉस्पिटल अटेंडेंट सहायक को नौकरी से निकाले जाने के नोटिस मिलने पर शनिवार सुबह कर्मचारियों ने प्रदर्शन शुरु कर दिया. धरने के बाद सूचना पर पहुंची ऋषिकेश तहसीलदार डॉ. अमृता शर्मा मौके पर एम्स प्रशासन से इस संबंध में बातचीत कर समस्या का तत्काल समाधान किये जाने के लिए निर्देशित किया.

धरना देने वाले कर्मचारियों का कहना है कि चंडीगढ़ की टीडीएस कंपनी के माध्यम से मई 2021 में हमने एम्स में जॉइनिंग की थी, इस दौरान हमें ₹30000 सैलरी के रूप में दिए गए हैं. साथ ही इस दौरान हमसे 11 महीने के कांटेक्ट फार्म पर भी साइन कराए गए थे. लेकिन जब वह 8 जनवरी की सुबह 8:00 बजे मीटिंग के लिए बुलावे पर यहां पहुंचे, तो कंपनी के मैनेजर ओम प्रकाश ने उन्हें नौकरी से बिना नोटिस दिये बाहर कर दिया.

जबकि अधिकांश कर्मचारियों का कार्यकाल अभी 6 महीने भी नहीं हुआ है. धरने पर बैठे प्रियंका पंवार, साहिल रावत, और टीटू पाल ने कहा कि उन्हें नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे कंपनी द्वारा तीस-तीस हजार रुपये भी लिए गए हैं. उन्होंने बताया कि इस एम्स में नौकरी करते हुए कुछ लोगों क 2 वर्ष हो चुके हैं. कुछ लोग दो तीन महीने पहले ही लगे हैं.

जिनके नौकरी के नाम पर दिए गए, पैसे भी वसूल नहीं हुए हैं. जो उन्हें पगार के रूप में तनख्वाह दी जा रही थी, उसमें से भी 15 सो रुपए टीडीएस के नाम पर काटे जा रहे थे. एम्स में सिक्योरिटी गार्ड का काम करने वाली रूबी शर्मा का कहना है कि उनसे भी ₹30000 सिक्योरिटी के नाम पर जमा कराए थे और आज उन्हें भी नौकरी से निकाल दिए जाने के बाद उनका भविष्य अंधकार में हो गया है.

जबकि अधिकांश लोग अन्य शहरों से आकर यहां नौकरी कर रहे हैं. जिसके कारण तमाम कर्मचारियों में रोष व्याप्त है. कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उन्हें कोई नौकरी नहीं दी जाएगी, वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे. कुल मिलाकर एम्स में कर्मचारियों द्वारा दिए जा रहे धरने के कारण स्थिति तनावपूर्ण परंतु नियंत्रण में बनी है, जबकि पुलिस प्रशासन भी मौके पर पहुंच गया है.

कर्मचारियों के समर्थन में उतरे विभिन्न राजनैतिक संगठन
शनिवार सुबह कर्मचारियों के प्रदर्शन की सूचना मिलते ही आम आदमी पार्टी के विधायक प्रत्याशी डा. राजे सिंह नेगी, उत्तराखंड जन एकता पार्टी के संस्थापक सदस्य कनक धनै, अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी के सदस्य जयेंद्र रमोला आदि ने एम्स ऋषिकेश पहुंचकर निष्कासित आउटसोर्सिंग कर्मियों के आंदोलन का नेतृत्व किया। सभी ने एम्स प्रशासन होश में आओ के नारे लगाए.

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