टेक्नोलोजी

संतरों के छिलके से बनी बिजली से जगमग होगा शहर

संतरों के छिलके से बनी बिजली से जगमग होगा शहर

स्पेन के सिविले शहर (Seville city of spain) में संतरों के छिलकों और खराब संतरों को इकट्ठा कर बिजली बनाई जा रही है. फिलहाल इस पायलेट प्रोजेक्ट में शुरुआती सफलता सामने आई है, इसमें खराब संतरों से निकलने वाली मीथेन गैस से बिजली तैयार की गई. बताया जा रहा है कि प्रयोग सफल होने पर इसे जल्द ही पूरे शहर के लिए लागू किया जा सकेगा.

स्पेन की राजधानी मैड्रिड (Capital of Spain, Madrid) से करीब 500 किलोमीटर दूर बसा सिविले शहर (Seville city) वैसे तो देश का चौथा सबसे बड़ा शहर होने की वजह से चर्चित रहा, लेकिन अब इसके सुर्खियों में होने की कई दूसरी वजहें हैं. यह शहर पर्यावरण को बचाने के लिए लगातार नए प्रयोग कर रहा है. हाल ही में शहर की नगर पालिका ने संतरों के छिलके व खराब संतरों से बिजली तैयार की.

इस पूरी प्रक्रिया में नगरपालिका के साथ यूरोपियन एसोसिएशन ऑफ पब्लिक वॉटर ऑपरेटर्स (European Association of Public Water Operators) का सहयोग रहा. इसका मुख्य उद्देश्य शहर के लिए जैविक तत्वों से बिजली तैयार करना है. इसके लिए आगे काफी बड़ी योजना तैयार की गई है. इस योजना के तहत साल 2023 तक अतिरिक्त बिजली बनाना चाहते हैं, ताकि बिजली के लिए अब तक चले आ रहे पारंपरिक स्त्रोतों का इस्तेमाल कम किया जा सके.

खराब संतरे को जमा करने को लगाए 200 लोग
वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट (Westwater Treatment) के दौरान विशेषज्ञों के दिमाग में जैविक पदार्थों से बिजली बनाने का विचार आया. जिसके बाद डीडब्ल्यू की रिपोर्ट में इस बारे में विस्तार से आया है. बाद में प्रयोग के लिए खराब संतरे जमा करने शहर से शुरू किए गए. सर्दियों में कुल 48000 पेड़ों से करीब 5.7 मिलियन किलोग्राम संतरे गिरकर खराब हो चुके थे, जिन्हें जमा कर लिया गया. इतने सारे संतरे जमा करने के लिए 200 लोगों की नियुक्तियां की गई. इन लोगों ने शहर भर में घूमकर पेड़ों से नीचे गिरे संतरे जमा किए.

संतरों से निकली मीथेन से बनी बिजली
योजना के तहत जमा किए हुए संतरों में से कुल 35 टन संतरों का जूस निकाला गया, जिससे इलेक्ट्रिक ऊर्जा और बायोगैस बनाई जा सके. इससे बचे छिलकों को खाद के काम में उपयोग किया गया. जूस निकालकर जमा करने के बाद इसे एक प्रक्रिया से गुजारा गया, जिससे बायोगैस पैदा हुई. इस बायोगैस में मीथेन करीब 65 प्रतिशत थी. इससे ही बिजली पैदा की गई.

साल 2050 तक बिजली के पारंपरिक स्त्रोतों को खत्म करने का टारगेट
योजना के शुरुआती ट्रायल की सफलता को लेकर स्पेन काफी उत्साहित है. इसका मकसद साल 2050 तक बिजली के पारंपरिक स्त्रोतों को खत्म कर पूरी तरह से जैविक चीजों से ऊर्जा तैयार करना है. जैसे संतरे या फिर इसी तरह के दूसरे फल या सब्जियां.

पायलेट प्रोजेक्ट से होगी बचत
इस योजना के तहत अनुमान लगाया जा रहा है कि पायलेट प्रोजेक्ट के बाद करीब 1,500 किलो वाट बिजली पैदा हो सकेगी, जिससे डेढ़ सौ घरों का काम हो सकेगा. जबकि 150 घरों के लिए बिजली तैयार करने में बिजली विभाग को लगभग 310,000 डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. इसका मतलब इस योजना में केवल सड़े हुए संतरों के इस्तेमाल से काफी बचत की जा सकती है. ट्रायल से सामने आया कि करीब 1,000 किलोग्राम संतरों से 50 किलो वाट बिजली बन सकती है. यह बिजली एक दिन में पांच घरों की बिजली की जरूरत को पूरा कर सकती है.

भारत के हैदराबाद में सब्जियों से बन रही बिजली
देखा जाए तो वैसे स्पेन इस पहल में अकेला नहीं. भारत के भी हैदराबाद शहर में भी जैविक ऊर्जा बनाने की कवायद चल पड़ी है. यहां की बोवनपल्ली मंडी में प्रत्येक दिन लगभग 10 टन कचरा निकलता है, जिससे करीब 500 यूनिट बिजली तैयार की जा रही है. इसके साथ ही जैविक खाद भी बनाई जा रही है. यह 500 यूनिट बिजली 100 स्ट्रीट लाइट्स जलाने के अलावा मंडी में मौजूद 170 स्टॉलों, एक एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग और पानी की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क के लिए काफी है. इसी के तहत जो 30 किलोग्राम बायोगैस बन रही है, उससे मंडी की कैंटीन में दिया जा रहा है, ताकि खाना बनाया जा सके.

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