उत्तराखंड

गढवाल महासभा ने गढ़वाली गीत बौ कु तमासू का लोकार्पण किया

पलायन पर आधारित व्यंग गीत है बौ कु तमासू गीत

पलायन पर आधारित व्यंग गीत है बौ कु तमासू गीत

देहरादून / ऋषिकेश:   अंतरराष्ट्रीय गढवाल महासभा ने गढ़वाली गीत बौ कु तमासू का लोकार्पण किया। यह पलायन पर आधारित व्यंग गीत है। इसमें पहाड़ों में हो रहे पलायन को दर्शाया गया है।

शनिवार को अंतरराष्ट्रीय गढवाल महासभा के दून मार्ग स्थित प्रदेश कार्यालय में कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में महासभा अध्यक्ष डा. राजे सिंह नेगी और लोक गायक दक्ष नौटियाल ने गढ़वाली गीत बौ कु तमासू का लोकार्पण किया। डॉ. राजे सिंह नेगी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य अपनी अनूठी लोककला और संस्कृति के लिए जाना जाता है। राज्य की कुछ लोक विधाओं ने तो देश और दुनिया में अपनी खास पहचान भी बना ली है। उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और लोक विधाओं को अब गति मिलने लगी है।

लोक गायक दक्ष नौटियाल ने बताया कि उनका ये नया गीत ए के फिल्म्स के बैनर तले रिलीज किया गया है। जिसे गीतकार सुबोध व्यास और संगीत शैलेंद्र सेलू द्वारा तैयार किया गया है। इस गीत में पहाड़ के पानी, संस्कृति सुंदरता के साथ ही पलायन की समस्या को मुख्य रूप से गीत के माध्यम से दर्शाया गया है। आधुनिक दौर में चकाचौंध के कारण युवा पीढ़ी लगातार अपने पहाड़ से पलायन कर मैदानी क्षेत्रों की ओर अग्रसर होती जा रही है। पहाड़ में निवास कर रहे बूढ़े मां बाप अपने बच्चों के बाहर वापस लौटने की आस लगाए बैठे रहते हैं। जबकि पहाड़ में अब तमाम संसाधन उपलब्ध हो चुके हैं, बावजूद उसके अभी भी पलायन जारी है। मौके पर अंकित नैथानी, मंगलेश बिजल्वाण, बिरेंद्र ममगाईं, बबलू नौटियाल, मनमोहन डिमरी, राहुल कटैत, प्रदीप डिमरी आदि उपस्थित थे।

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