पराली/फसल अपशिष्टों को जलाना तथा बिना स्ट्रा रीपर के कम्बाइन हार्वेस्टर मशीन को चलाना पूर्णतयः प्रतिबन्धित कर दिया गया हैः-आशुतोष कुमार मिश्र

Bhaskar News Agency

Nov 03, 2019

हरदोई(लक्ष्मीकान्त पाठक)आज कलेक्ट्रेट सभागार में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण, नई दिल्ली के निर्णय और तत्क्रम में भारत सरकार व उ0प्र0 सरकार द्वारा निर्गत शासनादेशों के अनुपालन में जनपद स्तर पर अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) संजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में गठित सेल की आपात् कालीन बैठक आयोजित की गई। बैठक में समस्त उपजिलाधिकारी एवं तहसीलदार, उप कृषि निदेशक व कृषि विभाग के साथ-साथ अन्य सम्बद्ध विभागों के अधिकारियों तथा पर्यावरण/प्रदूषण नियंत्रण विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी द्वारा प्रतिभाग किया गया। इस बैठक में एन0जी0टी0 के निर्णयों का अनुपालन सुनिश्चित कराने हेतु जनपद में पंजीकृत 66 कम्बाइन हार्वेस्टर मशीन के मालिकों को भी बैठक में आमंत्रित किया गया तथा भारी संख्या में हार्वेस्टर मालिकों ने बैठक में प्रतिभाग किया।
बैठक के में उप कृषि निदेशक आशुतोष कुमार मिश्र द्वारा सभी उपस्थित अधिकारियों एवं हार्वेस्टर मालिकों को सम्बोधित करते हुये अवगत कराया कि मा0 एन0जी0टी0 द्वारा खेतों में पराली/फसल अपशिष्टों को जलाना तथा बिना स्ट्रा रीपर के कम्बाइन हार्वेस्टर मशीन को चलाना पूर्णतयः प्रतिबन्धित कर दिया गया है। उनके द्वारा मशीन मालिकों से अनुरोध किया गया कि वे फसल की कटाई नीचे से करें ताकि बचे हुये फसल अवशेष कल्टीवेटर अथवा रोटावेटर से जुताई के समय खेत की मिट्टी में ही मिल जायें। उप कृषि निदेशक द्वारा यह भी जानकारी दी गई कि इन-सीटू मैनेजमेन्ट वाले यंत्रों पर 80 प्रतिशत तक अनुदान देय है। एस0एम0एस0(सुपर स्ट्रा मैनेजमेण्ट) मशीन पर भी 80 प्रतिशत अनुदान अनुमन्य है। प्रशासन पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिये कटिबद्ध है और इसमें हार्वेस्टर मशीन मालिकों को लोगों के स्वास्थ्य हित में सहयोग करना है। देश में तीन प्रदेशों हरियाणा, पंजाब एवं उत्तर प्रदेश की स्थिति पराली जलाने व पर्यावरण की दृष्टि से सर्वाधिक खराब है और हालात इतने खराब हो गये हैं कि भारत की राजधानी दिल्ली में हेल्थ इमरजेन्सी लागू की गई है। पराली/फसल अपशिष्टों को जलाने से रोकने की जिम्मेदारी सम्बन्धित कृषक के साथ-साथ उस हार्वेस्टर मशीन मालिक की भी होगी जिसने उस खेत में फसल कटाई की है। उप कृषि निदेशक द्वारा सचेत किया गया कि मशीन मालिक अथवा किसान यह न समझें कि उनके खेत की निगरानी नहीं हो रही है। सेटेलाइट द्वारा प्रत्येक खेत और उस खेत में होने वाली प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखी जा रही है और जिन खेतों में पराली जलाने की घटनायें हुई हैं, उनकी सूची भारत सरकार द्वारा फोटोग्राफ्स के साथ उपलब्ध कराई गई है। उप कृषि निदेशक द्वारा पराली जलाने की घटना के उपग्रह से प्राप्त फोटोग्राफ्स को बैठक में दिखाया गया। उप कृषि निदेशक द्वारा जानकारी दी गई कि जिलाधिकारी महोदय के नेतृत्व में पूरा जिला प्रशासन पराली जलाने की घटनाओं को रोकने और मा0 हरित न्यायाधिकरण के निर्णयों का अनुपालन कराने के लिये कटिबद्ध है और इस हेतु तहसीलोें में उप जिलाधिकारियों के नेतृत्व में पुलिस और कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ उड़नदस्तों का भी गठन कर दिया गया है। स्थानीय लेखपाल और कृषि विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारियों की संयुक्त टीम का भी निरन्तर भ्रमण हेतु गठन किया जा चुका है और पराली जलाने की कोई घटना अथवा बिना स्ट्रा रीपर के हार्वेस्टर मशीन का संचालन किसी भी दशा में सम्भव नहीं होगा। समस्त उप जिलाधिकारियों तहसीलदारों से अपेक्षा की गई कि वे नियमित रूप से क्षेत्रीय भ्रमण करते रहें और अपने अधीनस्थ लेखपालों और कृषि विभाग के क्षेत्रीय कार्मिकों की दैनिक प्रगति का अनुश्रवण करते रहें और घटनाओं के प्रकाश में आने पर विधिसम्मत कार्यवाही सुनिश्चित करें।

हार्वेस्टर मालिक नायब सिंह ने सुझाव दिया कि फसल कटाई के उपरान्त यदि फसल अवशेष/पराली अथवा भूसे को ग्राम पंचायतों में खोली गई गौशालाओं हेतु मनरेगा के माध्यम से क्रय कर लिया जाये तो पराली जलाने की घटनाओं को खत्म किया जा सकता है। हार्वेस्टर मालिक अपने ट्रेक्टर से इसको गौशालाओं तक पहुंचा दिया जायेगा। अपर जिलाधिकारी द्वारा इस सुझाव को अच्छा और व्यवहारिक बताते हुये इस पर अग्रेतर कार्यवाही के निर्देश दिये गये।
अपर जिलाधिकारी ने अपने सम्बोधन में सभी हार्वेस्टर मशीन मालिकों से अनुरोध किया कि वे शासन व एन0जी0टी0 की मंशा के अनुरूप बिना स्ट्रा रीपर के खेतों की कटाई न करें और पराली जलाने की घटनाओं को रोकने में…